- कब्ज में राहत: अरंडी का तेल (कैस्टर ऑयल) एक प्राकृतिक लैक्सेटिव (laxative) है। रात को गुनगुने दूध या पानी के साथ एक चम्मच तेल लेने से पुरानी कब्ज में आराम मिलता है।
जोड़ों और घुटनों का दर्द: इसके पत्तों पर सरसों का तेल लगाकर हल्का गर्म करके प्रभावित हिस्से पर बांधने से सूजन और दर्द कम होता है। गठिया (Arthritis) के मरीजों के लिए यह काफी प्रभावी है।
पीलिया (Jaundice) का उपचार: आयुर्वेद में पीलिया के लिए इसके पत्तों का रस रामबाण माना जाता है। सुबह खाली पेट इसके कोमल पत्तों का ताजा रस (लगभग 5-10 ml) लेने से लीवर फंक्शन में सुधार होता है।
त्वचा और बालों के लिए: इसका तेल झुर्रियों को कम करने, घाव भरने और बालों की ग्रोथ बढ़ाने में मदद करता है।
विभिन्न बीमारियों में उपयोग की विधि
बीमारी उपयोग विधि
पीलिया (Jaundice) अरंडी के कोमल पत्तों का रस निकालकर 1 चम्मच सुबह खाली पेट पिएं।
या गुण यानि देशी भोजपुरी भाषा में जिसे भेली कहते हैं उसके साथ इसका सेवन कर सकते हैं। इसके नये पत्ते (जिन्हें हम फुनगी/फन भी कहते हैं) को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें। इन्हें गुड़ के साथ मिलाकर छोटी-छोटी गोलियाँ बना लें और सुबह, दोपहर, शाम को तीन बार (तीन टाइम) सेवन करें।
नुकसान और सावधानियां (Side Effects)
अरंडी का पौधा जितना लाभकारी है, इसके उपयोग में उतनी ही सावधानी बरतनी चाहिए:
- जहरीले बीज: अरंडी के कच्चे बीजों का सेवन कभी न करें। इनमें 'रिसिन' (Ricin) नामक घातक जहर होता है।
- गर्भावस्था: गर्भवती महिलाओं को अरंडी के तेल का सेवन बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह समय से पहले प्रसव (labor pain) को प्रेरित कर सकता है।
- अत्यधिक सेवन: तेल की अधिक मात्रा लेने से दस्त, उल्टी, पेट में मरोड़ और कमजोरी हो सकती है।
सुझाव: किसी भी गंभीर बीमारी जैसे पीलिया में इसका उपयोग करने से पहले किसी आयुर्वेदिक विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।
Disclaimer: यह जानकारी सामान्य ज्ञान पर आधारित है। किसी भी औषधीय प्रयोग से पहले किसी आयुर्वेद विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।
